भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग - प्रागट्य ,पौराणिक कथा , माहात्म्य और मंदिर वास्तुकला !
१२ ज्योतिर्लिंगों में से छठ्ठे स्थान पर हे महाराष्ट्र का भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग। यह ज्योतिर्लिंग पुणे से लगभग ११० किमी दूर भीमा नदी के तट पर पश्चिमघाट के सह्याद्रि पर्वत पर स्थित हे। इस ज्योतिर्लिंग के माहात्म्य में ऐसा कहा जाता हे की अगर कोई व्यक्ति प्रतिदिन सूर्योदय के बाद द्धादश ज्योतिर्लिंगं स्त्रोत्र का पठन करते हुए शिवलिंग का पूजन करता हे , तो उसके सारे पाप धूल जाते हे और उसके लिए स्वर्ग के द्धार खुल जाते हे। इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग काफी बड़ा और विशाल कद का हे, इसलिए यह मंदिर मोटेश्वर महादेव के नाम से भी प्रचलित हे। शिवपुराण के अनुसार भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के प्रागट्य की कथा त्रेतायुग से जुडी हुयी हे। पूर्वकाल में रावण के भाई कुम्भकर्ण को पर्वत पर रहने वाली कर्कटी नाम की महिला मिली थी , उस पर्वतकन्या को देखकर ...