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भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग - प्रागट्य ,पौराणिक कथा , माहात्म्य और मंदिर वास्तुकला !

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                   १२ ज्योतिर्लिंगों में से छठ्ठे स्थान पर हे महाराष्ट्र का भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग।  यह ज्योतिर्लिंग पुणे से लगभग ११० किमी दूर भीमा नदी के तट पर पश्चिमघाट के सह्याद्रि पर्वत पर स्थित हे।  इस ज्योतिर्लिंग के  माहात्म्य में ऐसा कहा  जाता हे की अगर कोई व्यक्ति प्रतिदिन सूर्योदय के बाद  द्धादश ज्योतिर्लिंगं स्त्रोत्र का पठन करते हुए  शिवलिंग का पूजन करता  हे , तो उसके सारे पाप धूल जाते हे और उसके लिए स्वर्ग के द्धार खुल  जाते हे। इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग काफी बड़ा और विशाल कद का हे, इसलिए  यह मंदिर मोटेश्वर महादेव के नाम से भी प्रचलित हे।                      शिवपुराण के अनुसार भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के प्रागट्य की  कथा त्रेतायुग से जुडी हुयी हे।  पूर्वकाल में रावण के भाई कुम्भकर्ण को पर्वत पर रहने वाली कर्कटी नाम की महिला मिली थी , उस पर्वतकन्या को देखकर ...

जानिए भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग - स्थान , इतिहास और माहात्म्य के बारे में।

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               सावन का महीना शुरू होते ही त्योहारों के ताते लग जाते हे।  एक ख़तम हुआ नहीं की दूसरे त्यौहार की तयारी में लग जाओ... हरियाली तीज , नागपंचमी , छठ , शीतला सातम, जन्माष्टमी, रक्षाबंधन और अनगिनत।  हर कोई अपनी परंपरा   के अनुसार त्यौहार मनाता हे , पर महीनेभर के लिए शिवमंदिरो में शिवभक्तों की भीड़ लगी रहती हे। सावन के सोमवार के और अमास के दिन तो ये भक्तो की भीड़ अपनी पराकाष्ठा को छू जाती हे।  हमारे देश में ऐसे बहुत सारे शिवमंदिर हे जो अपने पौराणिक , ऐतिहासिक या फिर चमत्कारिक महत्व के लिए जाने जाते हे, पर भगवान शिव के १२ ज्योतिर्लिंग का स्थान सर्वोच्च हे।                 शिव पुराण की कथा के अनुसार , एक बार भगवान विष्णु और भगवान ब्रम्हा के बीच बहस हुइ की दोनों में सर्वोच्च कौन ? दोनों शिवजी के पास गए , तब भगवान शिव ने एक अनंत ज्योतिस्तंभ की रचना की और उनसे कहा की इस स्तंभ के दोनों छोर कहा हे बताये।  तब भगवान विष्णु ने हार मान ली , पर भगवान ब्रम्हा ने...