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मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग - मंदिर , पैराणिक कथा , ज्योतिर्लिंग का माहात्म्य , ऐतिहासिक महत्त्व और वास्तुकला।

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                   १२ ज्योतिर्लिंगों में दूसरा ज्योतिर्लिंग यानि की श्रीशैलें मल्लिकार्जुनम अर्थात श्री शैल पर्वत पर आया हुआ मल्लिकार्जुन धाम।  यह ज्योतिर्लिंग आँध्रप्रदेश के कृष्णा जिले में कृष्णा नदी के तट पर आया हुआ हे।  इस स्थान को दक्षिण का कैलास भी माना जाता हे।  शिवपुराण , स्कंदपुराण , महाभारत जैसे अनेक धार्मिक ग्रंथो में इस स्थान का उल्लेख मिलता हे।  महाभारत के अनुसार, इस शैल पर्वत पर शिव और पार्वती की पूजा करने से अश्वमेघ यज्ञ के सामान फल मिलता हे।  इस ज्योतिर्लिंग को शिव और शक्ति का संयुक्त रूप भी कहा जाता हे - मल्लिका यानि देवी पार्वती और अर्जुन को शंकर कहते हे।  शास्त्रों के अनुसार इस ज्योतिर्लिंग में शिवपूजा करने  से व्यक्तिमात्र  के सारे कष्ट दूर हो जाते हे और वो अनंत सुख की प्राप्ति करता हे।                    मल्लिकार्जुन  ज्योतिर्लिंग के प्रागट्य के साथ कई कथाए जुडी हुयी हे।  शिवपुराण के अनुसार ए...

जानिए भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग - स्थान , इतिहास और माहात्म्य के बारे में।

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               सावन का महीना शुरू होते ही त्योहारों के ताते लग जाते हे।  एक ख़तम हुआ नहीं की दूसरे त्यौहार की तयारी में लग जाओ... हरियाली तीज , नागपंचमी , छठ , शीतला सातम, जन्माष्टमी, रक्षाबंधन और अनगिनत।  हर कोई अपनी परंपरा   के अनुसार त्यौहार मनाता हे , पर महीनेभर के लिए शिवमंदिरो में शिवभक्तों की भीड़ लगी रहती हे। सावन के सोमवार के और अमास के दिन तो ये भक्तो की भीड़ अपनी पराकाष्ठा को छू जाती हे।  हमारे देश में ऐसे बहुत सारे शिवमंदिर हे जो अपने पौराणिक , ऐतिहासिक या फिर चमत्कारिक महत्व के लिए जाने जाते हे, पर भगवान शिव के १२ ज्योतिर्लिंग का स्थान सर्वोच्च हे।                 शिव पुराण की कथा के अनुसार , एक बार भगवान विष्णु और भगवान ब्रम्हा के बीच बहस हुइ की दोनों में सर्वोच्च कौन ? दोनों शिवजी के पास गए , तब भगवान शिव ने एक अनंत ज्योतिस्तंभ की रचना की और उनसे कहा की इस स्तंभ के दोनों छोर कहा हे बताये।  तब भगवान विष्णु ने हार मान ली , पर भगवान ब्रम्हा ने...